भारतीय अनुवाद परिषदमें आपका स्वागत है!

gargi

 

"अज्ञात को ज्ञात, भूत को वर्तमान, विदेश को स्वदेश और परिजनों को स्वजन बनाने में अनुवाद तथा अनुवादकों की महत्वपूर्ण भूमिका हमारे देश में सदियों से चली आ रही है और आज जब हम एक प्रकार से अनुवाद के युग में ही जी रहे हैं, तो शुद्ध और सुग्राह्य अनुवादों का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।"

- डॉ गार्गी गुप्त, संस्थापक, भारतीय अनुवाद परिषद (1928-1998)


Left: Ms Amrita Pritam – Dr. Harivansh Rai Bachchan, 1988<br>
Right: Former Chief Minister of Delhi, Ms. Sheila Dikshit, presenting the award to Dr. Ayyar, along with Dr. Gargi Gupta
Left: Ms Amrita Pritam – Dr. Harivansh Rai Bachchan, 1988
Right: Former Chief Minister of Delhi, Ms. Sheila Dikshit, presenting the award to Dr. Ayyar, along with Dr. Gargi Gupta

हमारे बारे में

भारतीय अनुवाद परिषद् भारत की पहली स्वयंसेवी संस्था है, जिसने अनुवाद के अध्ययन और प्रसार पर काम किया| जानी-मानी अनुवादक और अकादमिक, डॉ. गार्गी गुप्त ने कोलम्बिया यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की डिग्री के बाद, वर्ष 1964 में परिषद् की स्थापना की| पिछले पचपन वर्षों से भी अधिक समय में, परिषद् ने अकादमिक जगत में विशेष स्थान हासिल किया है| इस संस्था का उद्देश्य, देशभर में चल रहे अपने पाठ्यक्रम, समय-समय पर दिए जाने वाले पुरस्कारों और प्रकाशनों के माध्यम से अनुवाद का सिद्धांत और प्रयोग के माध्यम से अध्ययन करना है|

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निदेशक की कलम से

प्रो. पूरनचंद टंडन

भारतीय अनुवाद परिषद् वर्ष 1964 से राष्ट्रभाषा हिंदी, राजभाषा हिंदी तथा विदेशी एवं भारतीय भाषाओं के अनुवाद-विकास को समर्पित एक अखिल भारतीय स्वयंसेवी संस्था है जिसकी स्थापना भाषा एवं अनुवाद को समर्पित माननीय डॉ. गार्गी गुप्त ने की थी।

भारत सरकार के अनुदान से पोषित यह संस्था वर्ष 1990 से भारत सरकार से मान्यता प्राप्त एकवर्षीय स्नातकोत्तर अनुवाद (अंग्रेज़ी-हिंदी-अंग्रेज़ी) डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी सुचारू रूप से चला रही है। हिंदी भाषा के माध्यम से जो विद्यार्थी कनिष्ठ या वरिष्ठ अधिकारी बनना चाहते हैं, रेडियो, टेलीविजन, संपादन, पत्रकारिता, सूचना प्रौद्योगिकी, हिंदी कंप्यूटर, भाषा-प्रौद्योगिकी, विज्ञापन, सिनेमा, पर्यटन, संसद, बैंक, बीमा, रेलवे, ज्ञान-विज्ञान, तकनीक, भाषा विज्ञान तथा इसी प्रकार के अन्य क्षेत्रों में रोज़गार प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए अनुवाद का यह पाठ्यक्रम स्वर्णिम अवसर उपलब्ध कराता है। रोज़गारोन्मुख इस पाठ्यक्रम की लोकप्रियता एवं उपादेयता दिन-प्रतिदिन बढ़ती चली जा रही है। दिल्ली से बाहर हिंदी इतर भाषा-भाषी अनेक क्षेत्रों में भी इस पाठ्यक्रम को सुचारू रूप से चलाया जा रहा है। भारत सरकार ने इस पाठ्यक्रम को मान्यता प्रदान कर भारतीय अनुवाद परिषद के राष्ट्रीय संकल्प को पुष्ट किया है।

इस पाठ्यक्रम के प्रशिक्षण हेतु देश के जाने-माने अनुवादविद् एवं भाषाविदों, विषय के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाता है। अनुवाद के इस पाठ्यक्रम को यथासंभव व्यवहारमूलक तथा बहुदिशागामी अवसर प्रदान करने वाला बनाया गया है। प्रतिवर्ष हमारे अनेक विद्यार्थी सरकारी तथा गैर-सरकारी नौकरियों में, व्यवसाय में, संस्थाओं में तथा कंपनियों में रोज़गार हासिल कर रहे हैं। पाठ्यक्रम को कंप्यूटर तथा अद्यतन हाई-टैक जानकारियों से भी जोड़ा गया है। कुल मिलाकर यह एक प्रासंगिक, उपयोगी एवं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए आत्म-विश्वास का संकल्प प्रदान करने वाला आजीविका साधक पाठ्यक्रम है। परिषद इसके माध्यम से शिक्षा और रोज़गार के बीच एक सुदृढ़ सेतु बनाने का पुण्य कार्य करने में जुटी है। राष्ट्र निर्माण में तथा हिंदी भाषा के विकास, प्रचार एवं प्रसार में यह परिषद का उल्लेखनीय प्रदेय है। ‘भूमंडलीकरण’ की अवधारणा को साकार करते तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक भावनाओं को सशक्त-समर्थ बनाते इस पाठ्यक्रम में आपका हार्दिक स्वागत है। हम आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए अपनी अनंत-असीम शुभकामनाएँ अर्पित करते हैं।