हमारे बारे में

 

 

भारतीय अनुवाद परिषद् भारत की पहली स्वयंसेवी संस्था है, जिसने अनुवाद के अध्ययन और प्रसार पर काम किया| जानी-मानी अनुवादक और अकादमिक, डॉ. गार्गी गुप्त ने कोलम्बिया यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की डिग्री के बाद, वर्ष 1964 में परिषद् की स्थापना की| पिछले पचपन वर्षों से भी अधिक समय में, परिषद् ने अकादमिक जगत में विशेष स्थान हासिल किया है| इस संस्था का उद्देश्य, देशभर में चल रहे अपने पाठ्यक्रम, समय-समय पर दिए जाने वाले पुरस्कारों और प्रकाशनों के माध्यम से अनुवाद का सिद्धांत और प्रयोग के माध्यम से अध्ययन करना है|

डॉ. गुप्त की दूरदृष्टि से प्रेरित होकर दिल्ली यूनिवर्सिटी के आधुनिक भारतीय भाषाओँ के प्रोफेसर, अकादमिक और छात्रों के समूह ने आगे आकर इस प्लेटफ़ॉर्म को अधिक उपयोगी बनाने में योगदान दिया| अध्ययन के रूप में अनुवाद को वरीयता देना, उस समय के लिए एक जरूरी पहल थी|

स्नातकोत्तर डिप्लोमा सर्टिफिकेट

भारतीय अनुवाद परिषद् अनुवाद के क्षेत्र में, मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा अनुमोदित स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम (हिंदी-अंग्रेजी-हिंदी) संचालित करता है| 9 महीने के अवधि वाले इस पाठ्यक्रम के माध्यम से, इसके लगभग सभी अभ्यर्थियों को प्लेसमेंट उपलब्ध कराया जाता है| इस पाठ्यक्रम के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ विभिन्न सरकारी संस्थानों, जैसे केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो, केन्द्रीय हिंदी निदेशालय और केंद्री हिंदी संस्थान के विशेषज्ञ छात्रों के मार्गदर्शन हेतु आते हैं|

प्रकाशन

परिषद् वर्ष 1964 से अनवरत ‘अनुवाद’ नाम की त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन करती है| इस द्विभाषिक अनुवाद जर्नल को, विभिन्न विश्वविद्यालयों के लगभग सभी भाषाओँ के अनुवाद विभाग ने सबस्क्राइब किया हुआ है| बहुत से पीएचडी छात्र अपना शोध इस जर्नल को आधार बनाकर करते हैं, जिसके माध्यम से उन्हें भारतीय भाषाओँ के अनुवाद के प्रत्येक पहलु को जानने का मौका मिलता है| ये द्विभाषिक जर्नल विभिन्न भाषाओँ की संस्कृति, राजनीति को समझने का एक जरिया है| अनुवाद विषय पर परिषद् ने कुछ उच्च गुणवत्ता की किताबें भी प्रकाशित की हैं, जो अनेकों छात्रों और श्रेष्ठ पुस्तकालयों के लिए संग्रहणीय हैं|

अनुवाद पुरस्कार

भारतीय अनुवाद परिषद वर्ष 1987 से श्रेष्ठ अनुवाद और अनुवाद पर बेहतरीन लेखन को पुरस्कार देता आ रहा है| प्रत्येक वर्ष चार पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं: दो या दो से अधिक भाषाओँ में श्रेष्ठ अनुवाद करने वाले दो अनुवादकों को ‘द्विवागीश पुरस्कार’, अनुवाद पर श्रेष्ठ लेखन के लिए ‘नातालि पुरस्कार’ और अनुवाद क्षेत्र में जीवन पर्यंत बेहतरीन कार्य करने के लिए ‘अनुवाद श्री सम्मान’|

विशिष्ठ पुरस्कृत जन

पिछले 30 वर्षों में अनेकों गणमान्य व्यक्तियों को परिषद् के विशिष्ठ पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है| इनमें अमृता प्रीतम और हरिवंशराय बच्चन जैसे नाम शामिल हैं, जिन्हें वर्ष 1987 में पुरस्कार प्रदान किया गया था| अन्य नामों में ऐनी मोंटो (जिन्होंने निर्मल वर्मा, कृष्ण बलदेव वैद्य जैसे अनेकों साहित्यकारों का हिंदी से फ्रेंच में अनुवाद किया), डॉ. मदन लाल मधु (पद्म श्री और पुश्किन मैडल से सम्मानित, जिन्होंने अनेकों क्लासिक कृतियों का रूसी भाषा से हिंदी में अनुवाद किया), साथ ही विभिन्न भारतीय भाषाओँ के अनेकों श्रेष्ठ अनुवादक इस सूची में शामिल हैं|